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इलाहाबाद अर्धकुंभ 2019: पर्यटकों के लिए खास होगा मेला, ये होंगे मुख्य आकर्षण

Posted on Sep 28 2018 | by: admin | Comments : 0

इलाहाबाद अर्धकुंभ 2019: पर्यटकों के लिए खास होगा मेला, ये होंगे मुख्य आकर्षण

इलाहाबाद में जनवरी 2019 में होने वाले अर्धकुंभ मेले में अच्छी खासी भीड़ जुटने की उम्मीद है। अर्धकुंभ मेला हर 6 साल बाद होता है और केवल इलाहाबाद और हरिद्वार में ये मेला लगता है। आप भी कुछ महीने बाद लगने वाले इस कुंभ मेले का हिस्सा बन सकते हैं। अर्ध कुंभ मेला 14 जनवरी से 4 मार्च 2019 तक चलेगा है। इस बार के अर्ध कुंभ में काफी चीजें खास तौर पर होंगी जो पहले कभी नहीं हुई हैं। अगर आप यहां जाने की योजना बना रहे हैं तो मेले से जुड़ी इन खास बातों को जानकार ही यात्रा की योजना बनाएं। यहां हम आपको अर्ध कुंभ मेले के प्रमुख आकर्षणों की जानकारी दे रहे हैं।

लग्ज़री टैंट में ठहरने का विकल्प
कुंभ मेले के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब श्रद्धालु लग्ज़री टैंट में ठहर सकेंगे। अपने बजट के हिसाब से पर्यटक डीलक्स, सुपर डीलक्स और सुइट में से चुन सकते हैं। इन टैंट का किराया 10 हजार रुपए प्रतिदिन से शुरू होता है। इसके अलावा इस बार हेलिकॉप्टर व्यू और लेजर शो भी देखने को मिलेगा। सरकार ने इसके लिए काफी तैयारी कर रही है।

शाही स्नान
शाही स्नान का कुंभ मेले में काफी महत्व होता है शाही स्नान सबसे पहले अखाड़े के साधु करते हैं इनके बाद ही आम आदमी पवित्र गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान कर सकते हैं। इसके लिए आम लोग सुबह 3 बजे से ही लाइन लगा लेते हैं और साधुओं के स्नान के बाद नहाने जाते हैं। इस बार पहला शाही स्नान 15-15 जनवरी, दूसरा 4 फरवरी और तीसरा 10 फरवरी को है।

अखाड़ा और साधु
अखाड़े वो स्थान होते हैं जहां धार्मिक संगठन मिलते हैं इनमें अधिकतर साधु होते हैं। शिव की पूजा करने वाले अखाड़े का नाम शैव अखाड़ा होता है जबकि भगवान विष्णु को पूजने वाले साधुओं के अखाड़े का नाम वैष्णव अखाड़ा होता है। यहां आपको नागा, अघोरी जैसे कई तरह के साधु मिल जाएंगे। इन साधुओं के बारे को देखने और समझने की यह सबसे अच्छी जगह है।

सत्संग
कुंभ मेले के दौरान आपको जगह-जगह सत्संग होते हुए मिले जाएंगे। कई साधु सन्यासी हिंदू धर्म के बारे में प्रवचन देते हुए मिलेंगे। यहां कई आश्रम होते हैं जहां आप जब बैठकर सत्संग सुन सकते हैं। हिंदू धर्म को करीब से समझने का यह सुनहरा मौका होता है क्योंकि प्रवचन दे रहे साधु-सन्यासियों को हिंदू धर्म की काफी जानकारी होती है।

लंगर
इस दौरान खाने की कोई समस्या नहीं होती क्योंकि जगह-जगह लंगर चल रहे होते हैं इनमें साधु सन्यासियों के साथ आम आदमी को भी भोजन कराया जाता है। यहां खाने के लिए एक कम्यूनिटी एरिया बना होता है जहां फ्री में खाना दिया जाता है। अगर आप खाने नहीं भी जाना चाहते हैं तो इसकी फोटो क्लिक कर सकते हैं।

News Curtesy: Nav Bharat Times dated on 27th Sept 2018

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